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बाजार अर्थव्यवस्था क्या है

बाजार अर्थव्यवस्था क्या है
सरकार क्या कर सकती है?
वित्तीय क्षेत्र ने कहा है कि फंड तरलता बढ़ाने और राजकोषीय घाटे के विस्तार से बचने के लिए नए करों जरूरत है. सरकार को कम से कम ₹800 बिलियन की आवश्यकता है, जो रिपोर्ट के अनुसार नए करों के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है. हालांकि सरकार के लिए नए कर आर्थिक और राजनीतिक उथल फुथल के बीच लगाने मुश्किल हो सकते हैं.

मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

राज्य-निर्देशित अर्थव्यवस्था एक ऐसी प्रणाली है जहाँ राज्य या सहकारी समितियों के उत्पादन के लिये उत्तरदायी होते हैं। लेकिन आर्थिक गतिविधियों को निर्देशित योजना के रूप में किसी सरकारी एजेंसी या मंत्रालय द्वारा निर्देशित किया जाता है, जबकि मुक्त बाजार एक ऐसी प्रणाली है जिसमें वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य खुले बाज़ार और उपभोक्ताओं द्वारा निर्धारित किये जाते हैं, जिसमें आपूर्ति और मांग में सरकार द्वारा हस्तक्षेप नहीं किया जाता है। बाज़ार अर्थव्यवस्था में उन्हीं उपभोक्ता वस्तुओं का उत्पादन होता है जिनकी बाज़ार में माँग है। इसमें वही वस्तुएँ उत्पादित की जाती हैं जिन्हें देश के घरेलू या विदेशी बाज़ारों में लाभ के साथ बेचा जा सके।

राज्य-आधारित विकास के लाभ-

  • ससाधनों का तर्कसंगत उपयोग।
  • उत्पादन और विकास की दिशा में राज्य के संसाधनों का संकलन।
  • विकास मुख्य रूप से जनता के लिये होता है।
  • दूरस्थ क्षेत्रों में विकास संभव होता है।
  • देश बाजार अर्थव्यवस्था क्या है में विकास सुनिश्चित करने की नियोजित प्रक्रिया।
  • आम आदमी के हित को प्राथमिकता दी जाती है, जैसे- आवास, बिजली आपूर्ति, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा आदि।

बाजार अर्थव्यवस्था क्या है

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डॉलर के मजबूत होने से रुपया कमजोर, अर्थव्यवस्था को दोष नहीं दे सकते: गोयल

शेयर बाजार 13 घंटे पहले (24 नवंबर 2022 ,22:15)

डॉलर के मजबूत होने से रुपया कमजोर, अर्थव्यवस्था को दोष नहीं दे सकते: गोयल

© Reuters. डॉलर के मजबूत होने से रुपया कमजोर, अर्थव्यवस्था को दोष नहीं दे सकते: गोयल

में स्थिति को सफलतापूर्वक जोड़ा गया:

नई दिल्ली, 24 नवंबर (आईएएनएस)। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा कि रुपये की कमजोरी के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था को दोष बाजार अर्थव्यवस्था क्या है नहीं दिया जाना चाहिए, क्योंकि यह मुख्य रूप से डॉलर के मजबूत होने के कारण है।टाइम्स नाउ शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए, बाजार अर्थव्यवस्था क्या है मंत्री ने बढ़ती मुद्रास्फीति के बावजूद एक आशावादी टिप्पणी की, यह देखते हुए कि कई देशों में आसमान छूती मुद्रास्फीति की तुलना में, जहां यह 8 से 10 प्रतिशत के बीच है, भारत ने मुद्रास्फीति और ब्याज दरों के बीच एक उचित संतुलन बनाए रखा है और देश में मूल्य वृद्धि अन्य की तुलना में बहुत कम है।

Economy News: भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था पर ऊंची ब्‍याज दरों का रहेगा दबाव, लेकिन मंदी की आंशका नहीं- रिपोर्ट

Economy News: भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था पर ऊंची ब्‍याज दरों का रहेगा दबाव, लेकिन मंदी की आंशका नहीं- रिपोर्ट

मूडीज के अनुसार आने वाले साल के दौरान एशिया-प्रशांत (APAC) क्षेत्र में मंदी की आशंका नहीं है.

Indian Economy: महंगाई, रेट हाइक और जियो पॉलिटिकल टेंशन जैसे फैक्‍टर्स के चलते दुनिया की कई अर्थव्‍यवस्‍थाओं में मंदी की आशंका जताई जा रही है. लेकिन इस बीच भारत के लिए कुछ हद तक राहत वाली रिपोर्ट आ रही है. रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भारत में मंदी की आशंका से इनकार किया है. हालांकि मूडीज ने महंगाई पर चिंता जताई है और कहा है कि अगर ब्‍याज दरें ऊंची बनी रहती हैं तो आने वाले दिनों में देश की GDP ग्रोथ पर असर पड़ सकता है.

ऊंची ब्याज दरों का असर

मूडीज की रिपोर्ट के अनुसार आने वाले साल के दौरान एशिया-प्रशांत (APAC) क्षेत्र में मंदी की आशंका नहीं है. हालांकि, पूरे क्षेत्र पर ऊंची ब्याज दरों और ग्‍लोबल ट्रेड ग्रोथ धीमी रहने का असर जरूर बाजार अर्थव्यवस्था क्या है पड़ेगा. ‘APAC Outlook: A Coming Downshift’ टाइटल वाली रिपोर्ट में मूडीज ने कहा है कि अगले साल भारत धीमी ग्रोथकी दिशा में बढ़ रहा है जो इसकी दीर्घकालिक संभावना के अनुरूप है. पॉजिटिप पक्ष को देखें तो निवेश का फ्लो और टेक्‍नोलॉजी व कृषि में उत्पादन लाभ से ग्रोथ को गति मिलेगी.

रिपोर्ट में कहा गया कि अगर महंगाई ऊंचे स्तर पर बनी रहती है तो भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को प्रमुख नीतिगत दर रेपो रेट को 6 फीसदी के ऊपर रखना होगा. जिससे सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की ग्रोथ स्‍लो पड़ जाएगी. मूडीज ने अगस्त में अनुमान जताया था कि 2022 में भारत की ग्रोथ धीमी पड़कर 8 फीसदी रहेगी, 2023 में यह और धीमी होकर 5 फीसदी पर आ जाएगी. 2021 में यह 8.5 फीसदी रही थी.

ग्‍लोबल ट्रेड में सुस्ती का असर

अपनी रिपोर्ट में मूडीज ने कहा कि एशिया-पैसिफिक क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की गति धीमी पड़ रही है और ट्रेड पर निर्भर यह क्षेत्र ग्‍लोबल ट्रेड में सुस्ती के असर को झेल रहा है. मूडीज एनालिटिक्स में प्रमुख अर्थशास्त्री (एपीएसी) स्टीव कोचरेन ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में केवल चीन ही कमजोर कड़ी नहीं है बल्कि भारत समेत एशिया की अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का निर्यात मूल्य अक्टूबर में सालाना आधार पर गिरा है. हालांकि, भारत की निर्यात पर निर्भरता कुछ कम है.

क्षेत्रीय आउटलुक के बारे में मूडीज ने कहा कि भारत समेत एपीएसी क्षेत्र की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं भले ही महामारी संबंधी पाबंदियों को हटाने में देरी करने के बाद विस्तार कर रही है, यूरोप और बाजार अर्थव्यवस्था क्या है उत्तर अमेरिका में मंदी की आशंका के कारण 2022 की तुलना में 2023 आर्थिक ग्रोथ के लिहाज से सुस्त रहने वाला है. उन्होंने कहा कि आगामी साल में एपीएसी क्षेत्र में मंदी की कोई आशंका नहीं है हालांकि इस क्षेत्र को ऊंची ब्याज दरों और ग्‍लोबल ट्रेड ग्रोथ में नरमी से प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा.

Pakistan Economy: पाकिस्तान डिफॉल्टर होने के करीब, लड़खड़ाई अर्थव्यवस्था, अब क्या है सरकार के सामने रास्ता?

Economic Crisis In Pakistan: पाकिस्तान के वित्त मंत्री इशाक डार के बार-बार आश्वासन के बावजूद, अंतरराष्ट्रीय बाजार इन आश्वासनों पर भरोसा करने को तैयार नहीं है क्योंकि देश की अर्थव्यवस्था डिफ़ॉल्ट से बचने के लिए संघर्ष कर रही है.

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